← Back to Podcast/Dhat | Krishna Mohan Jha
Episode Transcript

Dhat | Krishna Mohan Jha

धत । कृष्णमोहन झा


चाय-बिस्कुट-नमकीन

धत

चुटकुलों और निन्दाओं और नक़ली ठहाको

धत

होड़ लेती विनम्रताओं और खोखली सुंदरताओं

धत

राजनीतिक रूप से सही कविताओं 

और पुरस्कार के लिए लार टपकाती जिह्वाओं

धत

बर्थडे-मैरेजडे-मदर्सडे-फ़ादर्सडे-चिल्ड्रेंसडे- टीचर्सडे-

हेल्थडे-ड्रायडे आदि

धत 

महँगाई-भत्ता और इन्क्रीमेंट

धत

 जीवनबीमा और मेडिकल इंश्योरेंस

धत

 होमलोन-आरडी-जीपीएफ-पीपीएफ

धत 

शर्मा-वर्मा-कुमार- गुप्ता-मिश्रा चौहान- राव-रंजन-झा इत्यादि


धत

रेंगने-रिरियाने की भाषा

धत एक कील में कब से ठुकी हुई

मनुष्य होने की अन्तिम परिभाषा

इन भाषाओं और परिभाषाओं को तोड़-फोड़कर

अपने सारे कपड़े-लत्ते छोड़कर

निष्कवच और निर्वस्त्र

मैं निकल जाना चाहता हूँ एक ऐसी अन्तहीन यात्रा पर

अपनी त्वचा तक उतार सकना शामिल हो जिसमें

फिर मैं देखता हूँ

वह कौन है जो आता है मेरे साथ

और कौन रक्त से छलछलाते मेरे शरीर पर फेंकता है पत्थर


धत । कृष्णमोहन झा

चाय-बिस्कुट-नमकीन धत चुटकुलों और निन्दाओं और नक़ली ठहाको धत होड़ लेती विनम्रताओं और खोखली सुंदरताओं धत राजनीतिक रूप से सही कविताओं और पुरस्कार के लिए लार टपकाती जिह्वाओं धत बर्थडे-मैरेजडे-मदर्सडे-फ़ादर्सडे-चिल्ड्रेंसडे- टीचर्सडे- हेल्थडे-ड्रायडे आदि धत महँगाई-भत्ता और इन्क्रीमेंट धत जीवनबीमा और मेडिकल इंश्योरेंस धत होमलोन-आरडी-जीपीएफ-पीपीएफ धत शर्मा-वर्मा-कुमार- गुप्ता-मिश्रा चौहान- राव-रंजन-झा इत्यादि

धत रेंगने-रिरियाने की भाषा धत एक कील में कब से ठुकी हुई मनुष्य होने की अन्तिम परिभाषा इन भाषाओं और परिभाषाओं को तोड़-फोड़कर अपने सारे कपड़े-लत्ते छोड़कर निष्कवच और निर्वस्त्र मैं निकल जाना चाहता हूँ एक ऐसी अन्तहीन यात्रा पर अपनी त्वचा तक उतार सकना शामिल हो जिसमें फिर मैं देखता हूँ वह कौन है जो आता है मेरे साथ और कौन रक्त से छलछलाते मेरे शरीर पर फेंकता है पत्थर

This transcript was automatically generated by the podcast creator and may contain errors. Aggregated via the PodcastIndex API.